मंगलवार, 19 नवंबर 2013

कीमत

कुछ दिन पहले एक काम से जनपथ मार्किट जाना हुआ। वैसे तो मैं कई बार इस बाजार में गया हूँ लेकिन सर्दियों के शुरूआती दिनों में मैं पहली बार इस बाजार में गया। बाजार में हर तरफ भीड़ ही पसरी थी और ऊनी कपड़ों की बहार सी छायी हुई थी। जहाँ देखो तो सूटर (स्वेटर), जैकेट्स, कोट और तरह-तरह के ऊनी कपडे थे। लेकिन एक बात जिसने मेरा ध्यान खींचा वो था वहाँ लगाई जाने वाली आवाजों ने, 450 के 3 टी-शर्ट्स, 500 की जैकेट इत्यादि।

पालिका बाजार के बाहर का एक दृश्य 
 मुझे याद आया कि इस तरह  आवाज लगा-लगा के हमारे शहर में पटरी पर तो नहीं पर हाँ हाट और मेले में सामान जरुर मिलता है। साल में दो बार, नवदुर्गा उत्सव के अवसर पर तो मेरे घर के बाहर ही मेला लगता है लेकिन जो सामान हमारे यहाँ आवाज लगा कर बेचा जाता है उसकी कीमत यही कोई 10-50 रुपये के बीच तो अब होने लगी है अन्यथा एक समय में तो यह 2-10 रूपये ही हुआ करती थी। अब पता नहीं यह महंगाई की मार है या कुछ जमाखोरों की कारिस्तानी पर वक्त से साथ हम इन 2 से 10 की कीमतों के फर्क के आदि हो गए हैं।

 पर यहाँ जब मैंने 500 रुपये का सामान भी आवाज लगाकर बिकते हुए देखा तब मुझे रुपये कीमत समझ में आयी कि यह वाकई कितनी गिर गयी है। तभी तो 500 रुपये का सामान भी यूँ पटरी पर बिक जाता है और लोग भीड़ लगाकर खरीदने के लिए खड़े भी रहते हैं। वरना हम तो 500 रुपये में कितना कुछ कर लेते थे लेकिन ये दिल्ली है भाई सबको उनकी कीमत से वाकिफ करा ही देती है चाहे फिर वो पैसा हो या रुपया, नेता हो या अभिनेता, इंसान हो या भगवान। 

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