बुधवार, 15 जून 2016

आता क्या है तुम्हें...?

आता क्या है तुम्हें ?
जान छिड़कना...
किस पर ?
दोस्त-यार-परिवार...
और काम ?
बिल्कुल इनका कोई भी काम...
इसमें प्रियतमा कहाँ ?
आँखों-सपनों में...
हक़ीक़त में नहीं ?
होती तो वो जान होती...
हम्म!


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें