वैसे तो एक जनवरी भी साल के बाकी के आम दिनो की तरह ही एक आम दिन होता है, लेकिन फिर भी बदलते साल का कुछ रोमांच इसे दिलचस्प बना देता है। वैसे हम खुद लगातार बदलने की प्रक्रिया से गुजरते रहते हैं, कोशिश होती है कि बदलाव अपने में लायेंगे लेकिन साल बदल जाते हैं हम नहीं बदल पाते और वही पुराने ढर्रे पर चलते रहते हैं।
खैर हम बदल रहे हैं ये नजर आने लगा है अगर बात राजनीति से शुरू की जाये तो दिल्ली में अरविंद के मुख्यमंत्री बनने से ज्यादा चौंकाने वाली बात ये रही कि युवा वर्ग की राजनीति में भागीदारी बढ़ रही है, अब युवा राजनीति को गटर नहीं समझ रहा। दूसरी तरफ जो युवा मोदीमय है उसे भी एक अन्य विकल्प नजर आ रहा है। इस बीच जो सबसे ज्यादा अचंभित करने वाली बात है वो है राखी बिडलान का मंत्री बनना। मात्र 26 साल की उम्र में किसी सरकार में मंत्री बनना वो भी बिना किसी राजनीतिक विरासत के इस देश कि राजनीति के बदलने की ओर संकेत करता है। भले ही अभी इन सभी के काम पर व्यापक चर्चा होनी बाकि है और इनके राजनीतिक तरीके पर भी, लेकिन जरा एक दशक या उससे थोड़ा और पहले भी नजर दौड़ाएं तो देश में ऐसा कोई उदहारण नहीं दिखता कि 26 की उम्र में कोई मंत्री बना हो।
एक बड़ा बदलाव अबकी से मुझे पाने प्रधानमंत्री में भी नजर आया कि वो अब राजनीतिक प्रश्नो से बचते नहीं हैं बल्कि उनका जवाब देते हैं जिसकी बानगी इस बार की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप देख सकते थे। अब ये तो भगवान का कसूर है कि वो कितने भी दमदार हो जाएँ लेकिन नजर ही बेचारे आते हैं। अब इसके लिए कोई भगवान में बदलाव लाये तो मुनासिब है।
हाँ भगवान ने जरुर अब लोगों के घरों तक पहुँचने का अपना टाइम बदल लिया है। पहले टीवी पर वो सुबह-सुबह दर्शन देने आते थे वो भी अक्सर शनिवार और रविवार के दिन लेकिन अब वो भी वीकेंड मानते हैं और शनि-रवि को टीवी से गायब रहते हैं भाई आखिर उनकी भी तो इच्छाएं हैं क्या बदलते दौर में उनका मन नहीं होता होगा कि वो भी न्यू इयर ईव पर पार्टी मनाने जाएँ। समय भी उनका बदल चुका अब तो वो रात को आते हैं प्राइम टाइम पर आत 8 बजे से।
वैसे अब उबके दर्शन करने वाले लोगों में भी बदलाव आया है अब वे टीवी के सामने रोली-चावल लेकर नहीं बैठते, न ही उन्हें इन सीरियलों के सास-बहू टाइप सीरियलों में बदलते जाने से चिड़ होती है और उन्हें अब जल्द ही इससे भी गुरेज नहीं होगा कि उनके भगवान संस्कृत क्यों नहीं बोलते, उनके लिए तो अच्छा है कि भगवान भी हाईटेक होते जा रहे हैं तभी तो विजुअल इफेक्ट्स के साथ आजकल भगवान साउथ के सुपरस्टार से कम नहीं लगते। इतना ही नहीं दर्शकों को अब धारावाहिकों में भगवान को लेकर दिखाए जा रहे तथ्यों की भी परवाह नहीं, तभी तो मूल शास्त्रों से तमाम असंगतियां होने के बाबजूद भी लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। वरना जोधा अकबर के नाम पर मचा बवाल तो आप जानते ही हैं वंही अब सीरियल आ रहा है इसी नाम से तो कोई बवाल नहीं। तो लोग थोड़े ही सही धार्मिक रूप से उदार तो हुए हैं।
वैसे एक बदलाव अब मैं अपने घर में भी देखने लगा हूँ मेरी दादी कि उम्र यही कोई 82 के आस-पास होगी जब एक साल पहले उन्हें हमने मोबाइल दिलाया था तो वो उससे बेहद अनजान थी और वैसे भी 80 की उम्र में कौन इस सरदर्दी को पालना चाहता है लेकिन उनकी जिजीविषा और तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें मोबाइल पर सिर्फ कॉल उठाने तक सीमित नहीं रखा बल्कि खुद से कॉल लगाने में भी दुरुस्त बना दिया है।
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| शपथ लेते हुए राखी बिड़ला (बिडलान) |
एक बड़ा बदलाव अबकी से मुझे पाने प्रधानमंत्री में भी नजर आया कि वो अब राजनीतिक प्रश्नो से बचते नहीं हैं बल्कि उनका जवाब देते हैं जिसकी बानगी इस बार की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप देख सकते थे। अब ये तो भगवान का कसूर है कि वो कितने भी दमदार हो जाएँ लेकिन नजर ही बेचारे आते हैं। अब इसके लिए कोई भगवान में बदलाव लाये तो मुनासिब है।
हाँ भगवान ने जरुर अब लोगों के घरों तक पहुँचने का अपना टाइम बदल लिया है। पहले टीवी पर वो सुबह-सुबह दर्शन देने आते थे वो भी अक्सर शनिवार और रविवार के दिन लेकिन अब वो भी वीकेंड मानते हैं और शनि-रवि को टीवी से गायब रहते हैं भाई आखिर उनकी भी तो इच्छाएं हैं क्या बदलते दौर में उनका मन नहीं होता होगा कि वो भी न्यू इयर ईव पर पार्टी मनाने जाएँ। समय भी उनका बदल चुका अब तो वो रात को आते हैं प्राइम टाइम पर आत 8 बजे से।
वैसे अब उबके दर्शन करने वाले लोगों में भी बदलाव आया है अब वे टीवी के सामने रोली-चावल लेकर नहीं बैठते, न ही उन्हें इन सीरियलों के सास-बहू टाइप सीरियलों में बदलते जाने से चिड़ होती है और उन्हें अब जल्द ही इससे भी गुरेज नहीं होगा कि उनके भगवान संस्कृत क्यों नहीं बोलते, उनके लिए तो अच्छा है कि भगवान भी हाईटेक होते जा रहे हैं तभी तो विजुअल इफेक्ट्स के साथ आजकल भगवान साउथ के सुपरस्टार से कम नहीं लगते। इतना ही नहीं दर्शकों को अब धारावाहिकों में भगवान को लेकर दिखाए जा रहे तथ्यों की भी परवाह नहीं, तभी तो मूल शास्त्रों से तमाम असंगतियां होने के बाबजूद भी लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। वरना जोधा अकबर के नाम पर मचा बवाल तो आप जानते ही हैं वंही अब सीरियल आ रहा है इसी नाम से तो कोई बवाल नहीं। तो लोग थोड़े ही सही धार्मिक रूप से उदार तो हुए हैं।वैसे एक बदलाव अब मैं अपने घर में भी देखने लगा हूँ मेरी दादी कि उम्र यही कोई 82 के आस-पास होगी जब एक साल पहले उन्हें हमने मोबाइल दिलाया था तो वो उससे बेहद अनजान थी और वैसे भी 80 की उम्र में कौन इस सरदर्दी को पालना चाहता है लेकिन उनकी जिजीविषा और तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें मोबाइल पर सिर्फ कॉल उठाने तक सीमित नहीं रखा बल्कि खुद से कॉल लगाने में भी दुरुस्त बना दिया है।


