मंगलवार, 3 मई 2016

पहली बारिश का एहसास..


आज की बारिश ने पहली बारिश के
अहसास को ताज़ा कर दिया..
मैं खड़ा था छत पर
कि तभी नज़र वो आई..
बारिश का मौसम इतना सुहाना
पहले कभी नहीं लगा..

अब छत से भागे हम उसके पीछे
पर वो फुरफुरा रही थी,काँप रही थी..
जब वैसे में उसने मुझे देखा..
तो वो सहम गयी..
अपने परों को समेटकर..
टकटकी निगाहों से मुझे देखने लगी..

मैं भी उसके पास जाने को बेताब था..
तभी एक हवा के झोंके ने उसे..
फिर मोहिनी रूप दे दिया..
और मैं अपने को रोक न सका..

चला उसको अपनी बाहों में बांधने..
उसे अपने आकंठ से लगाने..
उसका आलिंगन करने..

बारिश में उसका अधर रस..
पीने को मैं लालायित..

किन्तु जैसे ही मैं उसके नज़दीक पंहुचा..
वो शर्मा गयी..
और छिपा के आँचल में अपना मुखड़ा..
चली गयी घर के अन्दर..

फिर छज्जे पर वो खड़ी हो गयी.
तब से शुरू हुआ एक नया अध्याय..
मेरा और उसका खिडकियों से झाँकता..
प्रेमगान..!! 


नोट - इस कड़ी में दो और कविताएं लिखी हैं जिन्हें आगे साझा करूँगा. ( It is a poetry trilogy.)
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