हमारी बात उस दिन,
शुरू हुई थी चाय पर,
काम के बीच वही तो पल,
मिलते हैं कुछ फुर्सत के,
शुरू हुई थी चाय पर,
काम के बीच वही तो पल,
मिलते हैं कुछ फुर्सत के,
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| इस पर भी गौर फरमाएं.... |
नया-नया शौक चढ़ा है,
ग्रीन टी पीने का,
ग्रीन टी पीने का,
साथियों के साथ मैं,
झेल रहा था उस कड़वेपन को,
झेल रहा था उस कड़वेपन को,
वो मीठी मुस्कान सी वहां आई,
पर उससे किसी ने नहीं पूछा,
तो मैंने ही पूछ लिया,
बस फिर शुरू हुईं हमारी,
" सिर्फ बातें "
जहां सारा मशगूल हो गया चर्चाओं में,
कुछ समय यूँ ही मेल-मुलाकात,
गुफ़्तगू में ज़ाया होने लगा,
जबकि शहर ने हमारा,
विवाह तक रचा डाला,
कुछ समय यूँ ही मेल-मुलाकात,
गुफ़्तगू में ज़ाया होने लगा,
जबकि शहर ने हमारा,
विवाह तक रचा डाला,
फिर एक दिन,
मैंने ही उससे कहा कि,
किस्से सुनाए जा रहे हैं हमारे,
उसने बड़े दिल से कहा,
ये जहान तो हमेशा बैरी रहा है,
हम बस यूँ ही मेल-मुलाकात,
और गुफ़्तगू करते रहेंगे...
