
अक्सर हम दुनिया जहान को घूमने की चाहत रखते हैं और शुरुआत हम अपने घर से कुछ दूर के जगहों पर बहुधा आने-जाने से करते हैं, लेकिन कई बार उस स्थान पर बहुत बार जाने के बावजूद कुछ अनछुए से किस्से रह जाते हैं जो या तो वक्त की रेत से दब जाते हैं या ताजी हरियाली से लड़ते हुए उनकी ओट में छिप जाते हैं। इस बार मेरे गृहनगर की यात्रा इन्ही मायनों में खास रही, मेरे घर से करीब 20 किमी दूर पर एक शानदार 15वीं-16वीं सदी का ऐतिहासिक/धार्मिक पर्यटन स्थल ओरछा है।
अपने 23 वर्ष के जीवन में दसियों बार मैंने यहाँ भ्रमण किया होगा लेकिन कुछ छूटा रह गया था। यहाँ राम को राजा की तरह से पूजा जाता है। यह मुग़ल साम्राज्य के समय में समृद्ध बुंदेलखंड का भाग था और मुग़लों का एक महत्त्वपूर्ण साथी भी, लेकिन यहाँ के राजा द्वारा बनवाया गया उसका महल और जहाँगीर के सम्मान में बना जहाँगीर महल एक नजीर की तरह है और इसके परकोटे के बाहर हरियाली ने अपने आवरण में बहुत कुछ छिपा कर रखा है और इस बार की यात्रा उन्हीं कुछ छिपे स्थानों से पर्दा उठाने के लिए याद रहेगी।





