शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

ये रखेंगे भारत की इज्जत !

जकल फेसबुक युवाओं का अड्डा बना हुआ है और भारत के सारे राष्ट्रवादियों और देशभक्तों ने इसके माध्यम से देस के युवाओं को देस के इतिहास से रूबरू कराने का बीड़ा उठाया है और उसी कड़ी का एक हिस्सा नीचे साझा किया है जो आजकल फेसबुक पर काफी प्रचलित है, लेकिन यह सत्य कितना है ? खैर इस बात को यहीं छोड़ते हैं आप जरा इस पर नजर दौड़ाएं फिर कुछ और जानेंगे इन महान राजा जी के बारे में --


"इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड स्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए। शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत” का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज दिया। शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें बहुत अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अपमानित महाराजा जयसिंह वापस होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं।


कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ चुका था। वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके सामने नतमस्तक खड़े थे। महाराजा ने उस समय शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर, कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के खर्च का भुगतान कर दिया। 



ये हैं महान विभूति 


भारत पहुँच कर महाराजा जयसिंह ने सभी छ: कारों को अलवर नगरपालिका को दे दी और आदेश दिया कि हर कार का उपयोग (उस समय के दौरान 8320 वर्ग कि.मी) अलवर राज्य में कचरा उठाने के लिए किया जाए।


विश्‍व की अव्वल नंबर मानी जाने वाली सुपर क्लास रोल्स रॉयस कार नगरपालिका के लिए कचरागाड़ी के रूप में उपयोग लिए जाने के समाचार पूरी दुनिया में फैल गया और रोल्स रॉयस की इज्जत तार-तार हुई। युरोप-अमरीका में कोई अमीर व्यक्‍ति अगर ये कहता “मेरे पास रोल्स रॉयस कार” है तो सामने वाला पूछता “कौनसी?” वही जो भारत में कचरा उठाने के काम आती है! वही?


बदनामी के कारण और कारों की बिक्री में एकदम कमी आने से रोल्स रॉयस कम्पनी के मालिकों को बहुत नुकसान होने लगा। महाराज जयसिंह को उन्होने क्षमा मांगते हुए टेलिग्राम भेजे और अनुरोध किया कि रोल्स रॉयस कारों से कचरा उठवाना बन्द करवावें। माफी पत्र लिखने के साथ ही छ: और मोटर कार बिना मूल्य देने के लिए भी तैयार हो गए।


महाराजा जयसिंह जी को जब पक्‍का विश्‍वास हो गया कि अंग्रेजों को वाजिब बोधपाठ मिल गया है तो महाराजा ने उन कारों से कचरा उठवाना बन्द करवाया !"

तो ये हैं अलवर के महाराजा जो अपने देस की इज्जत रखने वाले हैं लेकिन इतिहास के जानकार जो हैं वो जानते होंगे कि यह मशहूर किस्सा भरतपुर के महाराजा से जुड़ा किस्सा है और ये कोई देसभक्ति के लिया निर्णय नहीं था बल्कि अपने दंभ और अहम् की संतुष्टि के लिया गया फैसला था। शायद ये बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा अलवर के महाराजा जयसिंह तो अपने राज्य में अपने निर्दयी स्वभाव के लिए जाने जाते थे और अपनी प्रजा को प्रताड़ित करने के लिए बदनाम थे। इतना ही नहीं वो  जनता से जुटाए राजस्व का प्रयोग अपने संदेहास्पद और अय्याशी वाले निजी खर्चों पर किया करते थे। इसीलिए अंग्रजों ने इन आरोपों की जांच के लिए एक परिषद् का गठन किया जिसने इन्हें जनता को निर्दयता शासित करने और राजस्व का गलत प्रयोग करने का दोषी पाया और इन्हें देस निकाला दे दिया और फ्रांस भेज दिया, वंही देस निकाला के दौरान पेरिस में इनकी मौत हुई और सत्ता इनके बाद तेज सिंह प्रभाकर के हाथ आई जिनके कुछ किस्से दिलचस्प हैं।

सोचने वाली बात- ये बात सभी को पता है कि उस समय राजा अपनी झूठी शान और ठसक के लिए जाने जाते थे और जिस घटना का जिक्र यहाँ है वह कंही से भी यह साबित नहीं करती कि उनका यह काम देस की शान में किया गया था बल्कि यह बताता है कि वो कितने दंभी और सनकी थे जिसके वजह से उन्होंने ये काम किया। वैसे ये भारत में ही मुमकिन है कि हम अपने युवाओं को ही अपने इतिहास की गलत परिभाषा देते हैं सोचना तो हमे ही होगा की हम उन्हें देना क्या चाहते हैं…क्या सिर्फ कुछ बरगलाता ज्ञान और कच्ची नींव या बनते मजबूत भारत की बागडोर। किसी भी विषय के दोनों पक्षों को जानना जरुरी तो होता ही है।

शनिवार, 7 सितंबर 2013

कुछ अनछुए से…




 क्सर हम दुनिया जहान को घूमने की चाहत रखते हैं और शुरुआत हम अपने घर से कुछ दूर के जगहों पर बहुधा आने-जाने से करते हैं, लेकिन कई बार उस स्थान पर बहुत बार जाने के बावजूद कुछ अनछुए से किस्से रह जाते हैं जो या तो वक्त की रेत से दब जाते हैं या ताजी हरियाली से लड़ते हुए उनकी ओट में छिप जाते हैं। इस बार मेरे गृहनगर की यात्रा इन्ही मायनों में खास रही, मेरे घर से करीब 20 किमी दूर पर एक शानदार 15वीं-16वीं सदी का ऐतिहासिक/धार्मिक पर्यटन स्थल ओरछा है।

 अपने 23 वर्ष के जीवन में दसियों बार मैंने यहाँ भ्रमण किया होगा लेकिन कुछ छूटा रह गया था। यहाँ राम को राजा की तरह से पूजा जाता है। यह मुग़ल साम्राज्य के समय में समृद्ध बुंदेलखंड का भाग था और मुग़लों का एक महत्त्वपूर्ण साथी भी, लेकिन यहाँ के राजा द्वारा बनवाया गया उसका महल और जहाँगीर के सम्मान में बना जहाँगीर महल एक नजीर की तरह है और इसके परकोटे के बाहर हरियाली ने अपने आवरण में बहुत कुछ छिपा कर रखा है और इस बार की यात्रा उन्हीं कुछ छिपे स्थानों से पर्दा उठाने के लिए याद रहेगी। 

यहाँ कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूँ.…













शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

एक कल्कि अवतार ये भी!

इन्सान या कल्कि अवतार
 मैं तो सबसे ज्यादा उनको लेकर उनके समर्थकों द्वारा किये जाने वाले दावों से खौफ खा जाता हूँ। अभी मोदीजी के हैदराबाद की रैली के बाद की ही बात है मेरे फेसबुक के खाते पर मैंने अपने एक मित्र की उनके सम्बन्ध में एक पोस्ट देखी तो मैं तो बेहोश होते-होते बचा, उसके कुछ अंश मैं यहाँ आपके साथ साझा करना चाहूँगा-

मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से विश्व में क्या-क्या बदल जायेगा- 
दरणीय  मोदी जी की एक बात का मैं कायल हूँ, जब वो कहते हैं कि आप मेरे खिलाफ हो सकते हैं या मेरे साथ लेकिन आप मुझे नजरंदाज नहीं कर सकते। बात भी ठीक है अब उनके द्वारा कभी न कभी ऐसा कुछ कह दिया ही जाता है कि उसके पक्ष-विपक्ष में से कोई एक रास्ता चुनना ही पड़ता है, उसे नजरंदाज तो नहीं किया जा सकता। पहले तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था डूब जाएगी क्यूंकि भारत तब न तो अमेरिका से हथियार खरीदेगा और न ही उसकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का सामान भारत में बिक सकेगा क्यूंकि मोदी जी स्वदेशी को बढ़ावा देंगे। दूसरा चीन भी बर्बादी के मुहाने पर खड़ा होगा क्यूंकि उसका 40% व्यापार खत्म जायेगा जो चीन अपने माल को भारत में डंप करके करता है इसका भी कारण आदरणीय मोदीजी द्वारा स्वदेशी भारतीय व्यापारिक तंत्र को मजबूत करना होगा यही नहीं उनके समर्थक पाकिस्तान को लेकर जो विचार रखते हैं उसके उदाहरण की आवश्यकता नहीं है लेकिन अरब देशों को लेकर भी कहा जा रहा है कि उस मरुस्थल में अभी और सूखा पड़ेगा क्यूंकि भारत अपना तेल आयात भी न्यूनतम स्तर पर ले आएगा और मोदीजी नवीकरणीय ऊर्जा को प्रमुख स्थान देंगे।

 जब हम इन दावों की पड़ताल करते हैं तो लगता है कि सब खोखला है और अगर ऐसे ही खोखले दावे करने वाले समर्थकों के दम पर अगर कोई ऐसा व्यक्ति प्रधानमत्री बन भी जाये जिससे जनता इतनी उम्मीदें बांध ले कि वो उसके बोझ तले ही दब जाये और खुलकर कोई फैसला भी न ले पाए तो उसका आने वाला भविष्य कितना अंधकारमय होगा। क्या भाजपा को इन भ्रांतियों पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि अगर जनता ने इतनी उम्मीद से उसे चुन भी लिया तो खरे न उतर पाने के बाद उसका क्या हाल होगा।

 अब जरा इन दावों पर गौर करे अगर मोदी जी को अमेरिका से इतनी नफरत ही होती या पश्चिमी देशों को उन्हें रुलाना ही होता तो क्यों वो हर साल वाईब्रेंट गुजरात जैसी गोष्ठी करते ताकि उनके यहाँ निवेश बढे। हम सभी बहुत अच्छे से जानते हैं कि आदरणीय मोदीजी नीतिओं में पूरी तरह पश्चिमी मॉडल को ही अपनाते हैं तो फिर उससे दुश्वारी क्यूँ होगी तो उनके समर्थकों को भी यह ध्यान रखना होगा। फिर उनको अमेरिकी वीजा दिलाने के लिए भी तो भाजपा लायलित है।


 हमें इस बात पर भी तो गौर फरमाना होगा कि यदि अरब देशों से आयात बंद हो गया तो अंबानी की जामनगर रिफाईनरी का क्या होगा। क्या मोदी उनको नुकसान में जाने के लिए कहेंगे जबकि वो तो गुजराती हैं । और माने या ना माने उनके अनुसार भारत की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का रूख बदलता है। 

इस बात पर थोडा गहन विचार करें तो हमे यह भी सोचना होगा कि किस तरह की सत्ता हम अब चलाना चाहते हैं जो सब कुछ तबाह और खत्म करने पर उतर आये।


 इससे तो हम भारत की सहिष्णु, शांतिप्रिय, गुटनिरपेक्ष और विश्व के साथ सहअस्तित्व वाली उदार छवि का ही सर्वनाश कर देंगे। अगर मोदी इतने की विध्वंसकारी हैं तो क्या हक है उन्हें और उनके समर्थकों को कि सरदार पटेल के नाम को इस्तेमाल करते हुए स्टेचू ऑफ यूनिटी बनायें । क्यूंकि उनके आने के बाद तो सब अलग-थलग होने का डर है। अतः मेरा विनम्र अनुरोध है आदरणीय मोदीजी से कि हम उन्हें नजरंदाज करना शुरू कर दें उससे बेहतर है कि वो इस तरह की भ्रांतियों को खुद से स्पष्ट करते हुए दूर करें क्यूंकि उनके समर्थक तो उन्हें भगवान विष्णु का कल्कि अवतार साबित करने में लगे हैं जिसका जन्म कलयुग का अंत करने को हुआ हो।